सोमवार, 15 अगस्त 2011

किशोर चौधरी की तीन कहानियां

नई पीढ़ी के ऐसे लेखक हैं किशोर चौधरी जो, जो भी लिखते हैं, उसे बड़े चाव से पढ़ा जाता है. किशोर जी की ये तीनों कहानियाँ उनके ब्लॉग से साभार ली गई हैं...





द्रोह का दायित्व

मोहनदास करमचंद गाँधी, जिन्हें हम आज महात्मा गाँधी के नाम से जानते हैं, ने अपने साप्ताहिक अखबार 'यंग इंडिया' में २७ मार्च १९३० को यह लेख लिखा, देखिया आज भी यह कितना प्रासंगिक है..., यह लेख अफलातून जी के फेसबुक नोट्स से साभार...


आदिवासी लोक-गीतों पर समकालीन बदलावों का प्रभाव

वर्धा स्थित महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में शोधार्थी भंवर लाल मीना ने पढ़िए कितना सुन्दर शोध किया है 




किशन पटनायक का आलेख

'दूसरा शनिवार' से साभार 


फाल्गुन विश्व में पहली बार बाल कथा

प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार ओमप्रकाश कश्यप की मशहूर कहानी परियों से दोस्ती विशेष रूप से फाल्गुन विश्व के बाल पाठकों के लिए





रंग अमो

वयोवृद्ध चित्रकार अरुण मोरघड़े जी इस १४ को ८५ वर्ष हो गए हैं... हालांकि फाल्गुन विश्व का अगस्त अंक इन्हीं  मूर्धन्य चित्रकार पर केन्द्रित होना था, लेकिन तकनीकी वजहों से यह संभव नहीं हो पाया. हम उन पर एक पुस्तिका प्रकाशित कर रहे हैं, जो बहुत जल्द आपके हाथों में होगी, इस अंक में अरुण मोरघड़े जी पर चार पृष्ट हैं, जिसमें सुभाष तुल्सीता और रत्नाकर भेलकर की कविताएं, संजय मेश्राम, रज्जन त्रिवेदी और डॉक्टर हनुमंत नायडू के आलेख हैं. यह समस्त सामग्री उन पर प्रकाशित हो रही पुस्तिका से ही हैं. 





मेरी अफगानिस्तान यात्रा

डॉक्टर असगर अली इंजीनिअर ने हाल ही अफगानिस्तान से लौटकर फाल्गुन विश्व के पाठकों के लिए यह यात्रा-वृत्तान्त लिखा..